ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

तितली

रंग बिरंगी तितली हूँ,
छोटा सा जीवन मेरा
जीती जब तक
बाग़ बाग़ घूमती
शान बगीचे की कहलाती
फूलों पर मंडराती
ना नाज़, नखरे मेरे
हर फूल से मोहब्बत मुझे  
महक उनकी की सूंघती
रसस्वादन पराग का करती
अठखेलियों से मन
उनका बहलाती 
उनमें घुल मिल,
उन जैसी दिखती
बच्चे बूढ़े सबको लुभाती
नाज़ुक शरीर
दुल्हन सा श्रृंगार मेरा
कोमल पंखों से निरंतर 
उडती रहती
तेज़,गर्मी बर्दाश्त नहीं,
आंधी, तूफ़ान से घबराती
मेरे भी दुश्मन बहुत
पक्षियों  से बच कर रहती
कब निवाला मुझे बना ले
इस बात से डरती
रहती 
18-04-2011
699-122-04-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है, लाजवाब

    मेरे ब्लॉग पर आयें, आपका स्वागत है
    मीडिया की दशा और दिशा पर आंसू बहाएं

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर बालरचना!
    भगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं