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शनिवार, 23 अप्रैल 2011

बदलनी है तो मेरी फितरत बदल

खुदा से इल्तज़ा है 
मुझे ना बदलना 
बदलनी है तो
मेरी फितरत बदल
नफरत को प्यार में
बदल
अन्दर पल रही
निराशा को बदल
मेरे ख्यालों को बदल
उन्हें उम्मीदों से भर 
चेहरे का नक्शा बदल
उसे हंसी 
मुस्कराहट से भर
निरंतर 
सब को खुश रख सकूं
जहन को  
ऐसे जज्बे से भर
 डा.राजेन्द्र तेला,निरंतर 

23-04-2011
742-162-04-11

8 टिप्‍पणियां:

  1. आशुतोष ने कहा…

    बहुत ही सुन्दर ...आशावादी सोच की कृति

    २३ अप्रैल २०११ ४:४४ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. खुबसुरत रचना और उतनी ही बेहतरीन प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. poonam singh ने कहा…

    सुन्दर
    २३ अप्रैल २०११ ९:४८ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. गंगाधर ने कहा…

    आशावादी सोच की कृति
    २३ अप्रैल २०११ ९:२७ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  5. हरीश सिंह ने कहा…

    बहुत ही सुन्दर
    २३ अप्रैल २०११ ९:०४ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  6. Vaanbhatt ने कहा…

    tela ji, dusaron ko khush dekhane ka khayal hi aapki fitrat ko darshata hai...is fitrat ko badalne na dijiye...auron mein bhi aisi fitrat paida ho dua kijiye...
    २४ अप्रैल २०११ ८:०८ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  7. Anita ने कहा…

    आमीन !

    २५ अप्रैल २०११ १०:३४ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं