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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

मैं खुदा से इतना सा चाहता


निरंतर खुदा से सब 
फ़रियाद करते
कुछ ना कुछ
 मांगते उस से
कोई दिल का सुकून
 माँगता
कोई धन दौलत
माँगता
मैं खुदा से इतना सा
चाहता
कभी कुछ ना 
माँगना पड़े किसी से 
जब बुलाये पास
अपने
गहरी नींद से 
ले जाना मुझे
21-04-2011
725-147-04-11
E

3 टिप्‍पणियां:

  1. Blogger Kunal Verma said...

    बेहद उम्दा गजल

    एक बार पधारेँ http://premkibhasha.blogspot.com

    April 22, 2011 7:53 PM

    उत्तर देंहटाएं
  2. डा. श्याम गुप्त23 अप्रैल 2011 को 9:13 am

    डा. श्याम गुप्त said...

    बेहतर... गीत...एवं भावना..

    April 22, 2011 8:11 PM

    उत्तर देंहटाएं
  3. DR. ANWER JAMAL said...

    वाह !

    April 23, 2011 9:26 AM

    उत्तर देंहटाएं