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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

वो कहीं दूर जा चुके थे

मैं उन्हें देखने में
मसरूफ रहा
वो कहीं और दिल
लगाते रहे
मैं उन्हें
अपना समझता रहा
वो नकाब पहने
किसी और को चाहते रहे 
होश में आया तब तक
मुझे भूल चुके थे
मैं निरंतर
इंतज़ार करता रहा
वो कहीं दूर जा
चुके थे
29-04-2011
781-201-04-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. kam shabdon me vazandaar baat kah dena agar kala hai toh is kala ke liye main aapko hardik badhaai deta hoon

    shaandaar aur marmaantak kavita...........
    waah waah waah

    उत्तर देंहटाएं