ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

उनके भोलेपन का जवाब नहीं

चेहरा मेरा
आंसूओं से भरा था
वो पूंछने लगे
मुंह धो कर आये हो ?
उनके
भोलेपन का जवाब नहीं
मेरा दिल  टूटा
उन्होंने पूंछा शीशे का था ?
निरंतर हर बात को
अपने अंदाज़ से कहते
रोते को भी हंसाते
मुझे कभी
आशिक ना समझा
मैं उन्हें
माशूक समझता रहा
दोनों के बीच
उनका
भोलापन आता रहा
30-04-2011
787-207-04-11

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें