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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

क्यूं रोता है ?


खुद के किये पर
क्यों रोता है?
रोने से होता भी क्या है
करना है तो सुधार कर
जो किया पहले आगे ना कर
वक़्त ने रंज दिए हम को
वक़्त ही धोता ग़मों को
जीना है तो खुशी से जी
रो रो कर क्यों जीता है
जो  होना है वो हो कर रहेगा
खुद की
तरफ से गलती ना कर
इश्वर पर विश्वाश रख
मेहनत के
रास्ते पर चलता चल
बहुत रो लिया अब तक
अब तो रोना बंद कर
हँसते गाते जीता चल
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
ज़िंदगी,कर्म,मेहनत,सुधार,जीवन मन्त्र

22-04-2011
729-151-04-11

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