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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

चाँद की ठंडक का राज़


थका हुआ था
लेटते ही नींद की 
गोद  में  समां  गया 
सपनों की
दुनिया में पहुँच गया
चाँद से मिलना हुआ
उसने मुस्कराकर कर
हाथ मिलाया
गले से लगाया
हाथ में  गर्माहट
मिलने में आत्मीयता थी
मुझे आश्चर्य हुआ
चाँद की
ठंडक का पता था
गर्माहट का अंदाज़ ना था
आश्चर्य से चाँद को देखा
गर्माहट का राज़ पूछा
चाँद ने जवाब दिया
अब भी उतना ही ठंडा हूँ
पर जब भी
किसी से मिलता हूँ
गर्माहट से मिलता हूँ
निरंतर
दिल खोल कर मिलता हूँ
मुझे चाँद की ठंडक का
राज़ पता चल गया
अब उसे जीने का
मकसद बना लिया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
21-04-2011
721-143-04-11
E

4 टिप्‍पणियां:

  1. Dr. shyam gupta ने कहा…

    सुन्दर भाव ...प्रेम से मिलोगे तो कूल-कूल रहोगे...क्या बात है ...
    २१ अप्रैल २०११ २:४६ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. sushma 'आहुति' ने कहा…

    bhut khubsurat...
    २१ अप्रैल २०११ ७:५५ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. Vaanbhatt ने कहा…

    bahut sundar vichaar...agar thande rahna chaahte ho to apani garmi transfer kar do...jisase milo garmjoshi se milo aur kud thande raho...achchha funda hai...
    २२ अप्रैल २०११ ८:१८ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. हरीश सिंह ने कहा…

    सुन्दर भाव
    २२ अप्रैल २०११ २:२६ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं