ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

हास्य कविता -बात करने को कोई ना था

पता चला
मित्र की 
पत्नी सख्त बीमार है
फ़ौरन अस्पताल पहुंचा
देखा कई महिलाएं
मित्र की पत्नी को घेरे 
खडी हैं
मैंने मित्र से पूंछा
क्या बीमारी है ?
सब महिलाएं 
घेर कर क्यों खडी हैं ?
मित्र बोला
सब उसके होश में आने का
इंतज़ार कर रही हैं
दस दिन से सारी सहेलियाँ
बाहर गयीं थी
ये अकेली रह गयीं थी
बात करने को कोई ना था
शहर में 
कौन क्या कर रहा
पता नहीं चल रहा था
निरंतर बिना बोले रहने से
अवसाद ग्रस्त हो गयी
होश में आते ही
सहेलियों को देखेंगी
उनसे बात करेंगी
शहर का हालचाल
मालूम होगा
तो फिर स्वस्थ हो
जायेंगी
27-04-2011
767-187-04-11
(समस्त महिलाओं से क्षमा याचना सहित) 
E

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें