ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

निरंतर देने वाला,लेने वाला भी बनता



विधि की विडंबना देख कर
आश्चर्य होता है 
जो मार्ग दिखाता
परमात्मा का रूप कहलाता 
वो भी मनुष्य की 
शरण में जाता 
जीवित रहने के लिए 
उसका सहारा लेता 
जीवित ना रहा तो
अंतिम क्रिया 
मनुष्य ही करता 
निरंतर देने वाला
लेने वाला भी बनता 
इश्वर का नियम कहो
या उसकी इच्छा कहो
उसका अंत भी 
मनुष्य सा होता
25-04-2011
762-182-04-11
(पुट्टापूर्थी साईं बाबा के निधन पर आए विचार)

1 टिप्पणी:

  1. एम सिंह has left a new comment on your post "निरंतर देने वाला,लेने वाला भी बनता":

    बहुत शानदार तरीके से आपने अपनी बात कविता में कह दी है.

    उत्तर देंहटाएं