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सोमवार, 11 अप्रैल 2011

अधूरी मुलाक़ात

डेढ़ बजे छुट्टी होती ,
फ़ौरन ऑटो पकडती
दो बजे मेरे दफ्तर
पहुँचती
मैं घड़ी देखता रहता
उनके इंतज़ार में
बावला होता रहता
मिलते,खुश होते
हाल चाल पूछते
आगे बढ़ते,उस से पहले
पत्नी का फ़ोन आता
समय याद दिलाया जाता
मैं घबराता
बुझे दिल से उन्हें विदा
करता
निरंतर इसी तरह
मन ही मन दुखी
होता रहता
कब अधूरी मुलाक़ात
पूरी होगी
परमात्मा से पूछता
रहता
11-04-2011
652-85-04-11

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