ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

लाहौल-विला-कुव्वत

मेरी बात
 पर वो कहने लगे
लाहौल-विला-कुव्वत
अमाँ क्या कह रहे हो ?
मुझे समझ नहीं आया
बोला लाहौल स्पिती
हिमाचल में है
जवाब आया,
हिमाचल में बर्फ गिरती है
मैं बोला बर्फ ठंडी होती है
जवाब आया
ठण्ड में सर्दी लगती है
वो बोले  सर्दी से  गर्मी अच्छी
उसमें आम मिलते हैं
मैंने कहा,आम को कौन पूंछता
सब ख़ास को पूछंते
वो बोले ,
कौन सा सवाल पूंछते ?
मैंने जवाब दिया
सवाल इम्तहान में होते
वो झल्ला गए, चिल्ला कर बोले
लाहौल-विला-कुव्वत
निरंतर बकवास कर रहे हो
मैंने जवाब दिया
आप को पहले भी बताया था
लाहौल स्पिति.....
आगे बोलने से पहले ही
वो बाल नोचने लगे
रुआंसे हो कर कहने लगे
लाहौल-विला-कुव्वत
दिमाग खराब कर दिया
अब चुप भी रहो
फिर हिमाचल में है बोले
तो कभी बात नहीं करूंगा
22-04-2011
738-158-04-11

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें