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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

उसने दीवाना समझा वो परवाना था

उसने
दीवाना समझा
वो परवाना था
शमा के आगोश में
रहना चाहता था 
रोशनी में
होश खो बैठा
उफ़ करे बिना
गर्मी-ऐ-हसरत में
जलता रहा
हर सितम खुशी से
सहता रहा
कब जल कर ख़ाक हुआ
शमा को
खबर तक ना हुयी
बेखबर शमा
माहौल को रोशन
करती रही
अँधेरे में जीती रही
एक दिन
वो भी बुझ गयी
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
गर्मी-ऐ-हसरत ,मोहब्बत,क्षमा,दीवाना,परवाना,सितम
08-04-2011
626-59-04-11

5 टिप्‍पणियां:

  1. शिवकुमार ( शिवा)8 अप्रैल 2011 को 12:17 pm

    शिवकुमार ( शिवा) has left a new comment on your post "उन्होंने दीवाना समझा मैं परवाना शमा का":

    बहुत सुंदर कविता .

    उत्तर देंहटाएं
  2. Dr (Miss) Sharad Singh has left a new comment on your post "उन्होंने दीवाना समझा मैं परवाना शमा का":

    सुन्दर अभिव्यक्ति ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (09.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं