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गुरुवार, 31 मार्च 2011

आसमान निरंतर रंग बदलता


आसमान
निरंतर रंग बदलता
कभी नीला, 
कभी लाल दिखता
सूर्य की लालिमा
अपने में समेटता
तपन बर्दाश्त करता
ऊर्जा जग को देता
जीवन को साकार करता
कभी चाँद की चांदनी में
चमकता
तारे गहने उसके,
आभा उसकी बढाते
पंछी उड़ कर,ठहरे हुए को
गतिमान बनाते
किस्म,किस्म के बादल
रूप जीवन के दर्शाते
घनघोर काले
वर्षा से जहाँ को भिगोते
जीवन का अहसास भरते
रुई से सफ़ेद बादल
परियों के देश के लगते
हवाओं में उड़ते रहते
पृथ्वी से उठा
काला,पीला धुंआ 
जज्ब करता
आकाश निरंतर स्थिर 
रहता
चुपचाप सब सहता रहता
भावनाओं में ना बहता
31-03-03
561—231-03-11
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

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