ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 30 मार्च 2011

जब दिल ही दे दिया,फिर नाराजगी कैसी



उन्हें तो
आदत भूल जाने की
निरंतर हमें सताने की
वादा कर के भूल जाना 
शौक उनका
ख़त का जवाब ना देना
अंदाज़ उनका
मिले तो ना पहचानना 
अदा उनकी
हम कैसे बराबरी 
करें उनकी
हर हरकत मंजूर
उनकी
जब दिल ही दे दिया
उनको 
फिर नाराजगी कैसी

30-03-03
559—229-03-11
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

1 टिप्पणी:

  1. हमें तो आज शर्म महसूस हुयी ..भारत की जीत की ख़ुशी उड़ गयी ... आपकी नहीं उडी तो आईये उड़ा देते है.
    डंके की चोट पर

    उत्तर देंहटाएं