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शनिवार, 1 जनवरी 2011

साया बन के जिऊंगा,दिल के हर कोने में ठिकाना बनाऊंगा

नफरत
जितनी करोगे
याद उतना आऊँगा
जितना दूर जाओगे
पास उतना आऊँगा
आइना सामने रखो 
मैं नज़र आऊँगा
ख़्वाबों में दिखूंगा
ख्यालों में पीछा ना
छोडूंगा
निरंतर साथ रहा हूँ
हर लम्हा साथ
रहूँगा
 कैसे दिल से निकालोगे
दूर अपने से करोगे 
साया बन के
जिऊंगा
दिल के हर कोने में 
ठिकाना बनाऊंगा
कोशिश तुम्हारी
कामयाब ना होने
दूंगा
01-01-2011  

नए साल में कुछ नया चाहिए


नए
साल में कुछ
नया चाहिए
भ्रष्टाचार,बेईमानी से
निजात चाहिए
रिअलिटी के नाम पर
अश्लीलता
से मुक्ति चाहिए
आंतकवाद का खात्मा
घोटालों पर कार्यवाही
अपराधों पर अंकुश
चाहिए
प्रशासन चुस्त,नेता
दुरुस्त चाहिए
माँ बाप को बच्चों से
प्यार,सम्मान चाहिए
बीमार को रोग मुक्त
शरीर चाहिए देश में शांती
भाईचारा चाहिए
नए साल में नया सोच
नया जज्बा चाहिए
भारत मेरा है
हर देशवासी के
दिल-ओ-दिमाग में  यह
भावना चाहिए
नए साल में कुछ
नया चाहिए
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

धूप जाती,उजाला साथ ले जाती

धूप जाती,
उजाला साथ ले जाती
अन्धकार को बुलावा देती
मुझे पीछे लौटाती
यादों में धकेलती
मैं बिस्तर पर लेटा
छत को देखता
ख्याल मन को फिर
परेशान करता
कहाँ है ? कैसे हैं?
घंटों जवाब नहीं मिलता
खुदा से उसकी
सलामती की दुआ करता
कब आँख लगी
पता भी नहीं चलता
सुबह जब नींद खुलती
धूप फिर खिलती
ज़मीं पर उजाला लाती
मन में आशा जगाती
शायद आज खबर
मिलेगी
उनकी वापसी होगी
या फिर धूप जाएगी
उजाला साथ ले
जाएगी
रात फिर मुझे हैरान
करेगी
31-12-2010
E

सलीके और कायदे के जाल में फंसा हूँ,क्यों इनसे मुक्त होता नहीं हूँ


जब 
भी अकेला होता 
हूँ 
बचपन में लौटता 
हूँ
हर दोस्त, 
हर हरकत को
याद करता हूँ,
नादानियों पर 
मुस्कराता हूँ,
ग्लानी में सर 
पकड़ता हूँ 
कभी खुद पर 
क्रोधित होता हूँ
कभी रोमांचित हो
उठता हूँ 
पक्षियों पर गुलेल 
चलाना
गेंद से खिडकियों के 
कांच तोड़ना
साइकिलों की हवा
निकालना
घरों की घंटियाँ 
बजा कर छुप जाना
खेल को युद्ध समझना
बुजुर्गों को छेड़ना,
चिडाना 
इन सब को याद कर
व्यथित और पुलकित
होता हूँ
आज तक नहीं समझ
पाया हूँ
क्यों बचपन लौटता
नहीं
क्यों बेफिक्र,नादान
वक़्त आता नहीं
निरंतर
सलीके और कायदे के  
जाल में फंसा हूँ
क्यों इनसे मुक्त 
होता नहीं हूँ
31-12-2010

हंसमुख जी ५० के हो गए,कुंवारे के कुंवारे रह गए


हंसमुखजी 
५० के हो गए
कुंवारे के कुंवारे रह गए
बन ठन कर रहते
मेकअप का नकाब
खूब लगाते
रिश्ते खूब आते
पर फौरन मना हो जाते
अरमान अधूरे रह जाते
एक दिन एक रिश्ता आया
कन्या से मिलना हुआ
रिश्ता स्वीकार हुआ
विवाह भी संपन्न हुआ
हंसमुख जी का सपना
पूरा हुआ
रात का वक़्त हुआ
मिलने का समय हुआ
बड़े प्यार से पत्नी का
घूंघट हटाया
सर और मुंह पर 
हाथ फिराया
बालों का विग
मेकअप का नकाब 
उतर गया
७५ की उम्र की अम्मा का
चेहरा नज़र आया
हंसमुख जी का खून 
जम गया
बड़ी मुश्किल से पीछा 
छुडाया
मेरे साथ धोखा हुआ
अदालत को बतलाया
बहुत मुश्किल से 
तलाक पाया
अब ना शादी में 
जाते हैं,
ना शादी का नाम
लेते हैं
कोई भूले से
ज़िक्र शादी का कर दे
फौरन सलाह देते हैं
बाल खींच कर,
चेहरा खुरच कर देखना
लोगों ने धोखा खाया
तुम धोखा मत खाना
निरंतर कहते हैं, 
शादी बर्बादी है
इसके पीछे वक़्त बर्बाद
मत करना
31-12-2010

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

चिराग घी का हो या हो तेल का


चिराग घी का हो
या हो तेल का
जलाओ जब भी
निरंतर रोशनी फैलाता
अन्धकार मिटाता
इंसान छोटा हो
या हो बड़ा
जाने अनजाने
किसी को खुशी देता
किसी को दुःख पहुंचाता
किसी को दोस्त,
किसी को दुश्मन बनाता
मजबूरी उसकी
कर्म करना वश में उसके  
नतीजा
बस में नहीं किसी के
30-12-2010
E

नव वर्ष आये,भरपूर हर्ष लाये

 
नव
वर्ष आये
भरपूर हर्ष लाये
खुशियों से जहाँ को 
महकाए
जीवन में उमंग लाये
निरंतर मोहब्बत बढाए
नए जज्बे से दिल को
रोशन करे
नया सोच जहन में भरे
रंज दिलों का दूर करे
पैगाम प्यार का
जहाँ में फैलाए 
शांती जग में बसाए
हर दिन शुभ बनाए
२०१० की बुराई
२०११ में ना
लाये
30-12-2010

वो चले गए ,रुखसत दुनिया से हुए,हर शख्श के लिए कुछ छोड़ गए

वो
चले गए ,
रुखसत दुनिया से हुए
हर शख्श के लिए
कुछ छोड़ गए
तारीफ़ में अलफ़ाज़ चार
लिख गए 
पता लोगों को लगा
सब चर्चा उनकी करने लगे
शान में कसीदे पढने लगे
 बढ़ चढ़ कर किस्से
बताने लगे 
कई रिश्ते उनसे बताते
निरंतर मिलते थे,
शान से कहने  लगे
जीते जी नफरत करते थे
मौक़ा ज़लील करने का
 ढूंढते थे
 नीचा कैसे  दिखाएँ
निरंतर सोचते थे
अब नज़दीकी अपनी
 दिखाने लगे
दस्तूर ज़माने का
निभाने लगे
30-12-2010