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शनिवार, 18 दिसंबर 2010

मौसम कैसा भी आए,हमें तो याद उन्हें करना

दुनिया
चाहे हँसे
हमें हर हाल में
रोना
दर्द हमारा हम ही
जानें
पल पल तडपाएंगी
उनकी यादें
गम हमारा हमें 
भुगतना
सब कुछ खुद ही
 सहना 
वक़्त किसी तरह
गुजारना
निरंतर  ख़्वाबों में
देखना
बहारें आएँ या बरखा
 आए
मौसम कैसा भी आए
हमें तो याद उन्हें
करना
हर लम्हा रोना
हर लम्हा
मरना
18-12-2010

तुम ना पहचानों कोई बात नहीं


तुम ना बताओ तो 
कोई बात नहीं
हम जानते हैं तुम्हारे 
दिल में क्या छुपा है
लाख छुपाओ 
छुप ना सकेगा 
राज दिल का गहरा 
कब तक सच छुपाओगे 
जुबान से नहीं तो 
चेहरे से बताओगे
जो लम्हे साथ बिताये
तुम्हें भी याद आते होंगे
निरंतर तड़पाते होंगे
हम सब्र से काम लेंगे
कभी तो 
सच को सच कहोगे 
हमें अपना मानोगे 
तब तक तुम्हारा 
इंतज़ार करेंगे
18-12-2010
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

भँवरा नहीं हूँ रस पियूं और उड़ जाऊं,बूँद ओस की हूँ,गर्मी से तुम्हारी पिघल जाऊं



तुम एक फूल
रंग और महक से
 भरीं हुयी 
मैं  तुम्हारी  
मोहब्बत में 
जकड़ा हुआ
एक दीवाना 
तुम्हें
दिल से चाहूँ
निरंतर जान लुटाऊँ
कहो जो कर जाऊं
भँवरा नहीं हूँ
रस पी कर उड़ जाऊं
ओस की बूँद हूँ 
तुम्हारी गर्मी से 
पिघल जाऊं
पिघल कर तुम में 
समा जाऊं   
महक में तुम्हारी 
बहक जाऊं
खुद  को भूल 
तुम में खो जाऊं
ज़िन्दगी तुम्हारे 
आगोश में बिताऊँ
ज़न्नत में साथ जाऊं
मोहब्बत क्या होती है
सारे जहान को बताऊँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
18-12-2010
मोहब्बत,प्यार

जो मिला माँ,बाप से वो क़र्ज़ नहीं

तुम कहते हो 
माँ बाप का 
क़र्ज़ चुका दोगे 
कहने से पहले 
इतना तो समझ लो
जो मिला माँ बाप से 
वो क़र्ज़ नहीं 
वरदान होता है 
उनका वात्सल्य
अतुलनीय होता है 
नींद खोते हैं 
चैन खोते हैं 
क्या नहीं सहते हैं
तुम्हारे लिए 
क्यूं कहते हो क़र्ज़ 
उसको
लौटाने की बात 
करते हो 
क्यों फ़र्ज़ नहीं 
समझते 
सोभाग्य नहीं
 मानते उसको
उनका साया 
परमात्मा के 
साये से 
कम नहीं होता 
माँ बाप की सेवा 
परमात्मा की 
भक्ति से 
कम नहीं होती 
उनका वात्सल्य 
कभी कोई संतान 
लौटा नहीं सकती 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
माँ,बाप,पिता ,वात्सल्य,जीवन,संतान
18-12-2010     

शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

मुस्कान उनकी छलावा थी,देखने वालों को यूँ ही लुभाती थी



वो क्या
मुस्काराए मुझे देख कर
पैर टिक नहीं रहे थे
 ज़मीं पर 
चढ़ाया मुझे आसमान पर
ना ख्याल खुद का रहा
ना रहा ज़माने का
जहन में ख्याल सिर्फ था
उन्हें पाने का 
कर दिया हाल बेहाल
दिल का
हर वक़्त रहता था
इंतज़ार उनका
निरंतर बात उनकी
ही करता
चर्चा ख़ूबसूरती का हर
शख्श से करता
निरंतर ख़्वाबों में
उन्हें देखता
ख्वाब रोज़ नए
बुनता
पता जब चला किसी से
इश्क करते हैं किसी
और से
अरमान टूट गए
दिल के टुकड़े कई हुए
आसमान से ज़मीन पर
आ गए
औकात से अपनी वाकिफ
हो गए
मुस्कान उनकी
छलावा थी
देखने वालों को यूँ ही
 लुभाती थी
17-12-2010

खुदा की नियामत समझो रिश्तों को


किस्मत वालों के 
बनते हैं रिश्ते
बड़ी मुश्किल से
निभते हैं रिश्ते
ना नफरत रखो 
ना कमियाँ ढूंढों 
ना सोचो 
क्या मिलेगा उनसे 
ना नफ़ा नुक्सान 
खोजो उनमें
रिश्तों में देना सीखो 
निस्वार्थ 
रखोगे रिश्ते को
खुद-ब-खुद 
बहुत कुछ दे देंगे 
रिश्ते
 प्यार से पालो 
सम्मान से रखो 
रिश्तों को
अहम् से दूर रखो
ना तोड़ो रिश्तों को
खुदा की नियामत
समझो रिश्तों को
पल पल जिओ 
रिश्तों को 
डा,राजेंद्र तेला,निरंतर
रिश्ता,सम्बन्ध,रिश्ते ,जीवन,जीवन मन्त्र  
17-12-2010

मोहब्बत हो ही गयी ,सिला जो भी मिलेगा,सह लूंगा


मोहब्बत
हो ही गयी
सिला जो भी मिलेगा
सह लूंगा
दिल लुटा दिया
जान भी लुटानी पड़े
लुटा दूंगा 
चाहत बहारों की रखी
इस्तकबाल खिजा का
 भी करूंगा
साज़ उठाये हाथों में
धुन गम की सुनाएं
सुन लूंगा
निरंतर हसरत से जिए
मिटा दें उन्हें
चुपचाप जी लूंगा
अरमान दिल के  
तोड़ दें
बर्दाश्त कर लूंगा
मोहब्बत
कर ही ली
कीमत मोहब्बत की
चुका दूंगा
17-12-2010