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शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

गुनाह उन के सर लिए खुश हो कर,जहन में बसाया उन्हें अपना समझ कर


 
प्यार
जिनको किया
हमने हर पल
रखा दिल के कोने में
महफूज़ उम्र भर
गुनाह उन के सर लिए
खुश हो कर
जहन में बसाया उन्हें
अपना समझ कर
मिले हम से वो अनजान
हो कर
सितम हम पर ढाया
जी भर
निरंतर वार पर वार
करते रहे
हम भी खाते रहे 
मलहम समझ कर
सहलाते रहे 
प्यार का जवाब
समझ कर  
30-10-2010

सफ़र मुश्किल नहीं आसान इसे बनाना है


 
सफ़र 
मुश्किल नहीं
आसान इसे बनाओ 
बड़ों का आशीर्वाद 
दुआ माँ बाप की लो
हिम्मत और जज्बे से
काम लो
क्रोध त्यागो
संवेदना से काम लो
निरंतर मेहनत करो
त्रुटियों से सबक ले 
सफ़र पर चल पड़ो
कर्म करो,आगे बढ़ो
मुश्किल सफ़र को
आसान करो
30-10-2010

देश के अन्दर पल रहे दुश्मनों का बायकाट करो





देश के अन्दर पल रहे दुश्मनों का बायकाट करो
================================
क्या 
शहीदों की कुर्बानी की
कीमत नहीं
क्या 
देशभक्तों की आन की
इज्ज़त नहीं
अब देश को दुश्मनों की
जरूरत नहीं
बोलने की आजादी के 
नाम पर
 देश को तोड़ने वालों की 
कमी नहीं
मानवाधिकार के नाम पर

हत्यारों को
बढ़ावा देने वालों की फितरत
घटी नहीं
विदेशी पुरस्कार की चाहत में
हद से गुजरने में शर्म नहीं
निरंतर खुद को खुले दिमाग का
बताने वालों की बढ़ रही 
जमात के
लालच में कमी नहीं
मात्र भूमि से दगा करने
वाले जयचंदों से 
बच कर रहो
खोखले विचारों का 
पर्दाफ़ाश करो
देश में पल रहे दुश्मनों का 
नाश करो
कश्मीर को दुश्मनों का 
बताने वालों से 
परहेज करो
देश के अन्दर पल रहे
दुश्मनों का बायकाट करो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
आज़ादी ,आजादी
30-10-2010

सब का खुदा एक हो,निरंतर इबादत साथ करें



काश
ऋतु  बदल जाए
हर मौसम में बहार आये
सूखी टहनी फूलों से भरे
हर चिड़िया सदा चहके
चाँद सूरज साथ उगें
हर पेट भरा हुआ
हर तन ढका हुआ
इंसान,इंसान रहे
प्यार ही प्यार पले
ना आशिक,ना माशूक हो
मोहब्बत में सब का दखल हो
दर्द का नामों निशाँ ना हो
ना कोई बीमार हो
ना दवा ले
 माँ बाप गर्व से,औलाद को देखें
औलाद बिन माँ बाप
अनाथ खुद को समझे
सब का खुदा एक हो
निरंतर इबादत
साथ करे
30-10-2010

छोडो इस को, कोई नयी बात करो



कहाँ नया घोटाला हुआ
जनता से धोखा हुआ
कहाँ लूट हुई कहाँ डाका पडा
छोडो इस बात को
अब कोई नयी बात करो
रिश्वत लेते पकड़ा गया
रिश्वत दे कर छूट गया
कोई मारा गया कोई बच गया
किसी का फायदा हुआ
किस का नुक्सान हुआ
छोडो इस बात को
अब कोई नयी बात करो
बलात्कारी बच गया
कातिल छूट गया
तुम्हारा क्या गया
सरकार किस ने पल्टी
पार्टी किसने बदली
टी वी पर चर्चा होती
अखबार में खबर छपती
तुम्हें क्या तकलीफ हुई
छोडो इस बात को
अब कोई नयी बात करो
कल बंद है परसों हड़ताल
कहीं बस में आग लगाई
पुलिस ने गोली चलाई
कौन सी नयी बात बतायी
सब की सब पुरानी हैं
छोडो इस बात को
अब कोई नयी बात करो
तुम वह मत करना
जो पहले होता रहा है
नफरत की आग में
इंसान ही इंसानियत
को जलाता रहा है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
30-10-2010

शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

मेरा तो अब भी एक ही मुकाम है


  मेरी आखों से दूर सही
दिल के मगर वो पास हैं
जुदा भले ही हो गए 
यादें फिर भी मेरे पास हैं
चाहे कहीं भी जीते रहे 
उनका साया मेरे साथ है
कितनी भी नफरत  करें
मेरा प्यार उनके साथ है
चर्चा चाहे पूरे शहर में हो 
मगर गुफ्तगू मेरे साथ है
मुझसे कितना भी छुपते रहे 
उनका ख्याल मेरे साथ है
मेरे लिए वो अब भी ख़ास हैं 
अब भी मेरा एक ही मुकाम है
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
29-10-2010

उदास चेहरे को खुशी से चहकते देखा



कुदरत का नया करिश्मा देखा
हवा के रुख को बदलते देखा
गुल को गुलिस्तान में लौटते देखा
एक बेवफा को बावफा होते देखा
खिजा को बहारों में पलटते देखा
ख़्वाबों को अपने मुकाम पर देखा
दिल को फिर से धड़कते देखा
मोहब्बत का नया अफ़साना देखा
लबों को फिर बोलते देखा
रुके वक़्त को चलते देखा
उदास चेहरे को खुशी से
चहकते देखा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर


29-10-2010

नींद खुली हम अकेले थे ,निरंतर सपने ऐसे ही देखते थे



नज़रों से देखा
अहसास प्यार का हुआ
मुस्कराए आशिक  उनके हुए
इशारा किया
दिल गदगद हुआ
हाथों से छुआ तो
दीवाना हुआ
ख्यालों में आये
 हम खो गए
ख़्वाबों में आये
उनमें डूब गए
इंतज़ार कराया
दिल बेचैन हुआ
उनका आना ना हुआ
दिल बेसब्र गया
बंद लिफ़ाफ़े में 
पैगाम आया
दिल घबरा गया
बेवफा हुए
दिल टूट गया
बेरुखी से उनकी 
रंज हुआ
किसी के साथ देखा
जीते जी मर गया
नींद खुली हम 
अकेले थे
निरंतर सपने ऐसे ही 
देखते थे
अकेले सोते थे 
अकेले उठते थे
29-10-2010