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शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2010

दिल को सुकून,कलम को नया जज्बा मिलेगा

                                                              अच्छी
या बुरी जैसी भी हैं 
आप मेरी कविताएँ  
 पढ़ रहे हैं
कलम को होंसला 
दे रहे हैं
रोज़ मेरा नाम देख 
रहे हैं 
कम से कम अब तो
मेरी साईट पर रजिस्टर 
कर लो
छोटी सी बात मेरी 
मान लो
थोड़ी खुशी मुझे भी 
दे दो
जब भी पेज खोलूंगा
आपको वहाँ देखूंगा
दिल निरंतर खुश होगा
दिल को सुकून
कलम को नया जज्बा
मिलेगा
15-10-2010

मुस्कराहट का जवाब ,निरंतर मुस्कराहट से दे दो

                                                                मैंने
चाँद और सितारे 
नहीं मांगे
तेरे कुछ लम्हे 
नहीं मांगे
ना निगाहों  के 
तीर  मांगे
मैंने तो तुझे चाहा है
हमेशा ही सराहा है
सपनों में जरूर देखा है
ख़्वाबों  में आते देखा है
अपने पास बैठा देखा है
इस पर भी शिकायत
क्यों तुझको?
क्यों देखती हो नफरत
से मुझ को?
मेरी नहीं खुदा की
सुन लो
इंसान हो इंसान से 
प्यार कर लो
नहीं तो,प्यार से मुझे देख लो
मुस्कराहट का जवाब
निरंतर मुस्कराहट 
से दे दो
15-10-2010

अब तो दिल की निकालो,एक इम्तहान और ले लो

 तेरे दर्द से
मेरे दामन को भर दे
तेरे दुःख मुझे दे दे
खुदा तुझे राहत दे दे
दीवाना तेरा हमेशा से रहा हूँ
निरंतर प्यार तुझ से
करता रहा हूँ
मेरे मशविरे को
प्यार की सौगात समझ  ले
नहीं दे सके हो,कुछ मुझ को
कम से कम अपनी,तकलीफें ही दे दो
अब तो दिल की निकालो
एक इम्तहान और ले लो

15-10-2010

मुहं से नहीं तो,लिख कर बता दें


                                                              जूनून
अब लिखने का है
बात अपनी कलम से
कहने का है
दबी ना रह जाए आग
दिल के कोने में
उस आग को अब
बुझाना  है
कई किस्से मन में दबे
कई विचार मष्तिष्क में इकट्ठे
बोझ उनका उतारना है
दिल,दिमाग को हल्का रखना है
अब तो निरंतर लिखना है
पढने वालों को बताना है
मुहं से नहीं तो,लिख कर
बता दें
दिल,दिमाग को हल्का
 कर दें
14-10-2010




गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

हर भारतीय को भाई समझो


धर्म
और प्रांत की आग को
अब जलने ना दो
लपटों को इस की
हवा ना दो
अब तो नादानी
बंद करो
बरसों तुमने भुगता है
क्या तुम्हें इस से मिला है?
हिसाब  अब तक का देख लो
पहले से ज्यादा जख्मी हो
जख्मों को नहीं बढ़ाओ
मलहम इन पर लगाओ
हर धर्म और प्रांत को
अपना समझो
इस फितरत से ऊपर उठो
भारत को ही धर्म और
मजहब समझो
हर भारतीय को भाई समझो
निरंतर सब को यही समझाओ
प्यार से रहो,और रहने दो
14-10-2010