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शनिवार, 28 अगस्त 2010

मोहब्बत से जीने दे

दिल अब संभालता नहीं,
कहीं कोई बदलता नहीं

किस्मत कहाँ ले आयी,
नज़र अपनों की फिर गयी

हंसी खोखली हो गयी,
मुस्कराहट भी खो गयी

चाहत एक ही रह गयी,
शायद कोई मिल जाये

मेरा अपना हो जाये,
दर्दे दिल समझ जाए

चिराग दिल मे जलाये,
कहकहे मेरे लौटाए

जीने का मकसद दे दे,
मेरा कल वापस दे दे

निरंतर वैसे ही रहने दे,
मोहब्बत से जीने दे

28-08-2010

जहां फिर महकेगा

मोम 
का दिया था,
लौ ने पिघला दिया
बाँहों में
 जिसने थामा था 
,वजूद उसका मिटा दिया
मांझी ने किश्ती को 
डुबा दिया
खुद को बुझा दिया
रोशन जहां में,
अँधेरा फैला दिया
अंजाम से बेखबर ,
वक़्त लौटता नहीं
मुरझाया हुआ फूल,
फिर खिलता नहीं
अब पछता रहा ,
रोशनी देने वाला,
रोशनी तलाश 
रहा
दुआ है,
खुदा इन्साफ करेगा,
नयी कली खिलेगी,
फूल बनेगी
पौधा लह्केगा,
जहां महकेगा
दिया, बाती का रिश्ता,
मिट न सकेगा
फिर बाती,
मोम की बाँहों में
मोहब्बत के घी से
"निरंतर"जलेगी,
रोशन जहाँ को करेगी,
दिया फिर लह्केगा,
जहां फिर महकेगा
28-08-2010

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है

चिड़िया बच्चे को,
प्यार से दाना खिला रही थी
उसकी भूख मिटा रही थी,
माँ का दायित्व निभा रही थी
तभी बाज़ ने,गोता लगाया,
चिड़िया ने हिम्मत से
बाज़ से,बच्चे को बचा लिया
पर खुद का जीवन ना बचा सकी
बच्चा डर कर चिल्लाने लगा
दूर ड़ाल पर बैठे कबूतर का,
ध्यान बच्चे की और गया
पास आकर बच्चे को सहलाया,
फिर प्यार से, दाना खिलाया
बच्चे की घबराहट ख़त्म हुई,
उसे नयी माँ मिल गयी ,
पुरानी कहावत चरितार्थ हुई
मारने वाले से बचाने वाला
बड़ा होता है
जिस का कोई नहीं होता है
उसका खुदा होता है


26-08-2010

बुधवार, 25 अगस्त 2010

प्यार तो प्यार है

प्यार तो प्यार है,
उसका जवाब ना दो

जाहिर ना कर सको तो,
नाकाम करार ना दो

प्यार मैं दिखावा चाहते हो?
खुले आम दर्शाना चाहते हो?

किसने किया कम,
किसने किया ज्यादा
इसका हिसाब चाहते हो?

प्यार का जवाब नहीं होता,
नफे या नुक्सान का,
हिसाब नहीं होता

एक पाक अहसास है,
होता है तो होता है

उसके होने का कोई,
वक़्त नहीं होता

ना तन से,ना मन से,
ना किसी मकसद से होता है,
प्यार तो निस्वार्थ होता है

"निरंतर"दिल से होता है,
"निरंतर"दिल मे रहता है,

प्यार तो प्यार है,
इसका हिसाब नहीं होता

25-08-2010

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

मन की ख़ुशी होठों से, बयान कर सकते हैं

वे मुस्करा रहे थे,
मन की ख़ुशी होठों से,
बयान कर रहे थे

आँखों मैं चमक,
चेहरे पर दमक,
उनकी सुन्दरता को,
निखार रहे थे

हर देखने वाले को,
चकाचोंध कर रहे थे,

"निरंतर"खुश हो रहे थे,
ख़ुशी बाँट रहे थे

यह देख ख्याल आया,
हम भी ख़ुशी मैं खुश,
गम मे हमदम हो सकते हैं

सुन्दरता को निखार सकते हैं,
मन की ख़ुशी होठों से,
बयान कर सकते हैं

24-08-2010

जीवन भी ऐसे ही चलता है,

मेरा मन मचल रहा है,
चंचलता से उफन रहा है

चाव से लगाये पौधे,
मैं कली को देख

उसके खिलने का,
इंतज़ार कर रहा है

कली खिलेगी,
फूल बनेगी,

पौधे की आभा बढ़ेगी,
नैनों की तृप्ति होगी,
सुगंध फैलेगी

धीरे धीरे फूल मुरझायेगा,
पंखुरियाँ गिराएगा

मन विचल और उदास होगा,
नयी कली ,नए फूल
का,इंतज़ार होगा

जीवन भी ऐसे ही चलता है,
"निरंतर"ऐसे ही चलेगा

कभी मन चंचल,
तो कभी उदास होगा

24-08-2010

मुकाम मिल गया है

मेरे दबे हुए ख्यालों को,
मुकाम मिल गया

पिंजरे मैं बंद पंछी को,
खुला आकाश मिल गया

डूबते हुए को किनारा,
थके हुए को,सहारा मिल गया

रोगी रोग मुक्त हो गया,
जीवन मैं व्यस्त हो गया

ख्याल मेरे जहन मैं,
कोहराम मचा रहे थे

जैसे आज़ादी के दीवाने,
देश प्रेम मैं तड़प रहे थे

अपने को घुटन से बचाओ,
ख्यालों को खुली हवा मैं,
"निरंतर"बाहर लाओ

जीवन रस पियो,
स्वच्छंदता से जियो,
और जीना सिखाओ

24-08-2010

सोमवार, 23 अगस्त 2010

व्यंग्य-कपडे सफ़ेद होने चाहिए

(व्यंग्य)
कपडे सफ़ेद होने चाहिए,
चाहे कितने भी दागदार हों,
दिखने सफ़ेद चाहिए,
झूठ,फरेब,घृणा से भरी हुयी,
मीठी मुस्कान से छुपी हुयी,
फितरत,दिखनी नहीं चाहिए,
दोगलेपन का 
साबुन इतना लगाओ,
कपडे,दूसरों के कपड़ों से,
निरंतर सफ़ेद दिखने चाहिए
23-08-2010
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
(समाज के गिरगिटों और येन केन प्रकारेण धन अर्जन की अंधी दौड़ मैं सम्मिलित,सफेदपोशों को हृदय से समर्पित)
गिरगिट,बेईमान,भ्रष्ट ,नेता 

शहीद हो जायेंगे

वे अदाओं से मारते हैं,
उन्हें खंजर की,
जरूरत नहीं
नज़रों से छलनी करते हैं
उन्हें असले की,
जरूरत  नहीं
इशारों से तड़पाते हैं,
उन्हें नजदीकियों की,
जरूरत नही
दिल बहलाने को
दिल लगाते हैं,
उन्हें दिलदार की,
जरूरत नहीं
हमें मारे
बिना ही मार दिया ,
अब उन्हें हमारी,
जरूरत नहीं
उन्हें चाहने वालों की
कमी नहीं ,
जिस दिन खुद
मोहब्बत के जाल में
फँस जायेंगे,
वक़्त की बात है
हमारे जैसे
वो भी शहीद हो जायेंगे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
मोहब्बत ,शायरी

23-08-2010

हर क्षण जियो

निरंतर जियो,
हर क्षण जियो
ना निर्जीव बनो,
ना जीवन को 
निर्जीव बनाओ
नीरसता निराशा
मन से हटाओ
हरयाली में 
रेत के गुबार,
मत उडाओ
नीरवता में 
ध्वनि का 
आभास कराओ
सुर संगीत से,
उसे सजाओ
मोहब्बत के रंगों से,
रंगीन बनाओ
निरंतर”जियो,
हँस कर जीओ
हर क्षण जियो
जीवन को 
जीवंत बनाओ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,नीरसता,निराशा  
22-08-2010
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